एवरेस्ट पर महा-रिकॉर्ड:1 दिन में 274 लोग शिखर पर !

माउंट एवरेस्ट पर इंसानी हौसलों ने इतिहास रचते हुए एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों के शिखर पर पहुँचने का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है।

एवरेस्ट पर महा-रिकॉर्ड:1 दिन में 274 लोग शिखर पर !

इंसानी जज्बे, अदम्य साहस और दृढ़ संकल्प ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) पर एक ऐसा नया इतिहास रच दिया है, जिसे देखकर पूरी दुनिया हैरान है। प्रतिकूल मौसम और बेहद कम समय की 'वेदर विंडो' (अनुकूल मौसम का छोटा समय) की कड़ी चुनौतियों को पार करते हुए पर्वतारोहियों ने एक ही दिन में एवरेस्ट फतह करने का अब तक का सबसे बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है।

एक ही दिन में 274 पर्वतारोही: टूट गया 2019 का रिकॉर्ड

पर्यटन विभाग और पर्वतारोहण अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, एवरेस्ट के दक्षिणी मार्ग (Nepal Side) से एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी (8848.86 मीटर) पर कदम रखकर सफल चढ़ाई पूरी की।

माउंट एवरेस्ट के इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही दिन में शिखर पर पहुंचे हैं। इस अविश्वसनीय कामयाबी के साथ ही पर्वतारोहियों ने साल 2019 का अपना ही पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। साल 2019 में एक दिन में सबसे अधिक 223 लोगों ने एवरेस्ट पर सफल चढ़ाई की थी, जिसे अब पीछे छोड़ दिया गया है।

खराब मौसम और 'वेदर विंडो' की कठिन चुनौती

इस साल एवरेस्ट पर चढ़ाई की राह बिल्कुल आसान नहीं थी। मौसम के लगातार बदलते मिजाज के कारण इस बार पर्वतारोहियों को बहुत ही छोटी 'वेदर विंडो' मिली। वेदर विंडो उस सीमित समय को कहते हैं जब बर्फीला तूफान थमता है, हवा की गति कम होती है और धूप निकलने से चढ़ाई के लिए परिस्थितियां थोड़ी अनुकूल होती हैं।

खराब मौसम की वजह से सैकड़ों पर्वतारोही लंबे समय से निचले कैंपों में इंतजार कर रहे थे। जैसे ही मौसम साफ होने का छोटा सा संकेत मिला, कैंप-4 से शिखर की ओर बढ़ने की होड़ लग गई। बेहद कम समय होने के बावजूद, शेरपा गाइडों के सटीक मार्गदर्शन और पर्वतारोहियों के फौलादी हौसलों ने इस खतरनाक सफर को एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड में बदल दिया।

एवरेस्ट के 'डेथ ज़ोन' में बढ़ा ट्रैफिक का खतरा

एक ही दिन में इतने सारे लोगों के शिखर की ओर बढ़ने से एवरेस्ट के सबसे खतरनाक हिस्से, जिसे 'डेथ ज़ोन' (Death Zone) कहा जाता है, वहाँ भारी ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) जैसी स्थिति देखने को मिली। 8,000 मीटर से ऊपर के इस क्षेत्र में ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम होता है और यहाँ ज्यादा देर रुकना जानलेवा साबित हो सकता है।

पर्वतारोहण विशेषज्ञों के अनुसार, 'हिलैरी स्टेप' और बॉटलनेक जैसे संकरे रास्तों पर कतारें लगने के कारण पर्वतारोहियों को कड़ाके की ठंड में घंटों इंतजार करना पड़ा। हालांकि, इस भारी भीड़ और मुश्किलों के बावजूद रिकॉर्ड संख्या में लोगों का सुरक्षित वापस लौट आना अपने आप में एक बड़ा चमत्कार माना जा रहा है।