दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में से 19 भारत में, बड़ी है भट्ठी की तरह तपने की वजह !
दुनिया के 20 सबसे गर्म शहरों में 19 का भारत में होना एक गंभीर क्लाइमेट इमरजेंसी का संकेत है, जिसकी मुख्य वजह कंक्रीट के बढ़ते जंगल और 'सुपर अल-नीनो' का खतरनाक प्रभाव है।
21 अप्रैल 2026 को जारी डेटा के अनुसार, दुनिया के 20 सबसे गर्म स्थानों में से 19 अकेले भारत में दर्ज किए गए। भागलपुर (बिहार), तालचेर (ओडिशा) और आसनसोल (पश्चिम बंगाल) जैसे शहरों में पारा 44°C को पार कर गया है। भारत का एक बड़ा हिस्सा इस समय किसी 'भट्ठी' की तरह तप रहा है।
आखिर भारत के साथ ऐसा क्यों हो रहा है? विशेषज्ञों ने इसके पीछे कई बड़े और चिंताजनक कारणों की पहचान की है:
1. अर्बन हीट आइलैंड (Urban Heat Island) प्रभाव
शहरों के सबसे गर्म होने की सबसे बड़ी वजह 'कंक्रीट का जंगल' बनना है।
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कंक्रीट और डामर: शहरों में सड़कें और इमारतें कंक्रीट और डामर (asphalt) से बनी होती हैं, जो सूरज की रोशनी को सोख लेती हैं और रात में भी गर्मी छोड़ती रहती हैं।
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हरियाली की कमी: पेड़ों की कमी के कारण 'वाष्पीकरण-शीतलन' (Evaporative Cooling) की प्रक्रिया नहीं हो पाती, जिससे तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में 4-8°C तक अधिक हो जाता है।
2. सुपर अल-नीनो (Super El Niño) का असर
वर्ष 2026 में 'सुपर अल-नीनो' का प्रभाव देखा जा रहा है। यह प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने की एक घटना है, जो पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। भारत में इसके कारण मानसून कमजोर पड़ता है और गर्मी के दिनों में लू (Heatwave) की तीव्रता कई गुना बढ़ जाती है।
3. शुष्क उत्तर-पश्चिमी हवाएं
पाकिस्तान और राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म और शुष्क हवाएं उत्तर और मध्य भारत के मैदानी इलाकों में तापमान को तेजी से बढ़ा रही हैं। आसमान साफ होने के कारण सीधी धूप सतह को और ज्यादा तपा रही है।
4. जलवायु परिवर्तन और हिमालय में बदलाव
यूरेशिया और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ की चादर (Snow cover) कम हो रही है। सामान्यतः बर्फ सूरज की किरणों को परावर्तित (Reflect) कर देती है, लेकिन बर्फ कम होने से जमीन ज्यादा गर्मी सोख रही है, जिससे पूरे क्षेत्र का तापमान बढ़ रहा है।
5. 'तापीय अन्याय' (Thermal Injustice)
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के 57% जिले 'उच्च जोखिम' श्रेणी में हैं। शहरों में घनी आबादी और वेंटिलेशन की कमी के कारण गरीब बस्तियों में तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा महसूस होता है।
क्या हैं इसके परिणाम?
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स्वास्थ्य संकट: हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मामलों में भारी बढ़ोतरी।
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बिजली की मांग: एसी और कूलर के बढ़ते उपयोग से पावर ग्रिड पर भारी दबाव।
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खेती पर असर: समय से पहले गर्मी बढ़ने से गेहूं और अन्य फसलों की पैदावार में कमी।
यह केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर क्लाइमेट इमरजेंसी है। वडोदरा जैसे बढ़ते शहरों में भी अब 'ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर' और जल संरक्षण को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है, ताकि भविष्य की गर्मियों को सहनीय बनाया जा सके।
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