इजरायल में उतरे 11 F-22 रैप्टर: क्या युद्ध शुरू होने वाला है ?
प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा से ठीक पहले अमेरिका ने वहां अपने 11 घातक F-22 रैप्टर लड़ाकू विमान तैनात कर दिए हैं। यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने और एक कड़ा कूटनीतिक संदेश देने के लिए उठाया गया है।
PM मोदी के इजरायल पहुँचने से पहले अमेरिका ने तैनात किए 12 F-22 रैप्टर: क्या ईरान पर हमले की है तैयारी?
मिडल-ईस्ट (Middle East) में युद्ध के बादल एक बार फिर गहराते नजर आ रहे हैं। एक ओर जहाँ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी, 2026 को अपनी ऐतिहासिक दो-दिवसीय यात्रा पर इजरायल पहुँच रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने इजरायल के एक दक्षिणी एयरबेस पर अपने सबसे घातक 12 F-22 रैप्टर (F-22 Raptor) लड़ाकू विमानों को तैनात कर दिया है।
इस कदम ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आखिर अमेरिका ने भारतीय पीएम की यात्रा के समय ही यह कदम क्यों उठाया? आइए जानते हैं इसके पीछे के मुख्य कारण।
1. ईरान के साथ बढ़ता तनाव और न्यूक्लियर वार्ता
इस सैन्य तैनाती का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। हाल ही में जेनेवा में हुई परमाणु वार्ता (Nuclear Talks) के विफल होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को "गंभीर परिणाम" भुगतने की चेतावनी दी है। माना जा रहा है कि ये विमान ईरान के परमाणु ठिकानों पर संभावित हमले के लिए 'कवर' का काम कर सकते हैं।
2. PM मोदी की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पूरा क्षेत्र हाई अलर्ट पर है। PM मोदी इजरायल की संसद 'नेसेट' (Knesset) को संबोधित करने वाले पहले भारतीय नेता बनने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह तैनाती न केवल ईरान को कड़ा संदेश देने के लिए है, बल्कि इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के दौरान क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता को रोकने के लिए एक सुरक्षा कवच (Deterrence) भी है।
3. F-22 रैप्टर: दुनिया का सबसे खतरनाक विमान
अमेरिका ने इजरायल में जिस विमान को तैनात किया है, वह कोई साधारण फाइटर जेट नहीं है:
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स्टील्थ तकनीक: यह रडार की नजर में आए बिना दुश्मन के इलाके में घुस सकता है।
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एयर सुपीरियरिटी: इसे दुनिया का सबसे बेहतरीन 'हवा से हवा' में लड़ने वाला विमान माना जाता है।
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इतिहास: जून 2025 में 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' के दौरान भी इन्हीं विमानों ने ईरानी ठिकानों पर हमले में मुख्य भूमिका निभाई थी।
4. इजरायल और भारत के बीच बढ़ते रक्षा संबंध
PM मोदी की इस यात्रा का उद्देश्य भारत और इजरायल के बीच सामरिक साझेदारी (Strategic Partnership) को और मजबूत करना है। रक्षा, अंतरिक्ष और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में कई बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी यह भी दर्शाती है कि लोकतांत्रिक देशों का यह गठबंधन (India-Israel-USA) इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एकजुट है।
क्या युद्ध टल सकता है?
इजरायली मीडिया के अनुसार, अधिकारी मान रहे हैं कि ईरान पर हमला अब "अनिवार्य" हो चुका है, बशर्ते ईरान अपनी परमाणु नीतियों में आखिरी समय पर कोई बड़ा बदलाव न करे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया है कि "डिप्लोमेसी हमारी पहली प्राथमिकता है, लेकिन घातक सैन्य बल का प्रयोग करने से हम पीछे नहीं हटेंगे।"
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