फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव: चुनाव आयोग ने हटाया 2003 का डिक्लेरेशन क्लॉज !

आसान हुआ वोटर आईडी बनवाना: फॉर्म-6 में 2003 के रिकॉर्ड वाली घोषणा हटने से युवाओं को मिली राहत। अब नहीं अटकेगा नए वोटर बनने का आवेदन।

फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव: चुनाव आयोग ने हटाया 2003 का डिक्लेरेशन क्लॉज !

वोटर रजिस्ट्रेशन: फॉर्म-6 से हटी 2003 वाली घोषणा की शर्त, जानें क्या है नया नियम

भारत निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फॉर्म-6 में हाल ही में किए गए एक अहम बदलाव को वापस ले लिया है। इस संशोधन के तहत आवेदकों से यह घोषणा मांगी जा रही थी कि क्या उनके माता-पिता या वे स्वयं वर्ष 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) के दौरान मतदाता सूची में पंजीकृत थे या नहीं। अब इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को अधिकांश राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल से हटा दिया गया है।

क्या था फॉर्म-6 का विवादित क्लॉज?

नए मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए भारतीय नागरिकों को फॉर्म-6 भरना होता है। चुनाव आयोग द्वारा पोर्टल पर जोड़े गए नए नियम के तहत पहली बार वोटर आईडी के लिए आवेदन करने वालों से एक अतिरिक्त घोषणा (Declaration) मांगी गई थी:

  • माता-पिता का 2003 रिकॉर्ड: आवेदक को स्पष्ट करना था कि क्या उनके माता-पिता का नाम 2003 के पिछले गहन पुनरीक्षण में शामिल था या नहीं।

  • सबमिशन में रुकावट: तकनीकी रूप से इसे अनिवार्य न बताए जाने के बावजूद, कई जगह इस सेक्शन को भरे बिना ऑनलाइन फॉर्म सबमिट नहीं हो पा रहा था।

  • दंडात्मक प्रावधान का डर: जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत फॉर्म में गलत घोषणा करने पर सजा या जुर्माने का प्रावधान है। ऐसे में 18 से 21 वर्ष के युवा, जिनके पास 20-22 साल पुराना पारिवारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था, वे कानूनी उलझन और फॉर्म निरस्त होने की आशंका में थे।

बदलाव केवल SIR वाले राज्यों में क्यों?

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 (Registration of Electors Rules, 1960) के अनुसार फॉर्म में किसी भी तरह के स्थायी बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार के विधायी संशोधन के दायरे में आता है। आयोग के भीतर भी इस प्रक्रियात्मक बदलाव को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं।

इसके बाद आयोग ने निर्णय लिया कि:

  1. गैर-SIR राज्यों में राहत: जिन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है या सामान्य सारांश पुनरीक्षण चल रहा है, वहां पोर्टल से इस अतिरिक्त घोषणा को पूरी तरह हटा दिया गया है और पुराने मानक फॉर्म-6 को ही बहाल किया गया है।

  2. SIR वाले क्षेत्रों में स्थिति: यह अतिरिक्त घोषणा पत्र केवल उन्हीं चुनिंदा राज्यों/क्षेत्रों के लिए सीमित रखा गया है जहां वर्तमान में गहन पुनरीक्षण (SIR) की विशेष प्रक्रिया आधिकारिक रूप से सक्रिय है।

नए मतदाताओं पर इसका क्या असर पड़ेगा?

  • आसान आवेदन प्रक्रिया: पहली बार मतदाता बन रहे युवाओं को अब 2003 के दस्तावेजों या माता-पिता के पुराने वोटर रिकॉर्ड की खोजबीन नहीं करनी होगी।

  • मानक दस्तावेज ही मान्य: अब सामान्य प्रक्रिया के तहत केवल आयु प्रमाण पत्र (जैसे आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट) और निवास प्रमाण पत्र देकर ही फॉर्म-6 भरा जा सकेगा।

  • खारिज होने का जोखिम खत्म: माता-पिता के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के कारण फॉर्म अटकने की समस्या अब सामान्य क्षेत्रों में समाप्त हो गई है।

फॉर्म-6 ऑनलाइन कैसे भरें?

  1. आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: भारतीय निर्वाचन आयोग के पोर्टल (voters.eci.gov.in) या 'Voter Helpline App' पर लॉगिन करें।

  2. फॉर्म-6 चुनें: नए मतदाता पंजीकरण (New Voter Registration) विकल्प पर क्लिक करें।

  3. व्यक्तिगत विवरण दर्ज करें: नाम, जन्म तिथि, वर्तमान पता और मोबाइल नंबर भरें।

  4. दस्तावेज अपलोड करें: आयु और पते का स्व-सत्यापित प्रमाण पत्र तथा पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करें।

  5. सत्यापन और सबमिशन: साधारण घोषणा (Declaration) को स्वीकार कर फॉर्म सबमिट करें। इसके बाद जनरेट हुए रेफरेंस नंबर से एप्लिकेशन का स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है।