विवादों के बीच EC की बड़ी बैठक, लिए ये बड़े फैसले !

विवादों के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक, लिए गए मतदाताओं के हित में कई कड़े फैसले!

विवादों के बीच EC की बड़ी बैठक, लिए ये बड़े फैसले !

विवादों के बीच चुनाव आयोग की बड़ी बैठक: CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति से लिए कई कड़े और ऐतिहासिक फैसले

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर कार्यप्रणाली, मतदाता सत्यापन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर चल रही चर्चाओं व विवादों के बीच शनिवार को आयोग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पूर्ण (फुल कमीशन) बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के साथ दोनों चुनाव आयुक्त उपस्थित रहे। निर्वाचन आयोग द्वारा शनिवार को जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, आयोग ने आपसी विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से कई बड़े नीतिगत और प्रशासनिक सुधारों को मंजूरी दी है।

यह बैठक मतदाता सूची पुनरीक्षण, प्रशासनिक जवाबदेही और आयोग की आंतरिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक मानी जा रही है।

बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले

आयोग की इस उच्चस्तरीय बैठक में लिए गए निर्णयों को मुख्य रूप से दो प्रमुख भागों में स्पष्ट किया गया है:

1. मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रशासनिक सुधारों पर कड़े निर्देश

  • BLO घर जाकर एकत्र करेंगे दस्तावेज:

    विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के तहत जिन लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) खुद संबंधित व्यक्ति के घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। सामान्य परिस्थितियों में इसके लिए व्यक्तिगत सुनवाई अनिवार्य नहीं होगी।

  • वंचित व बेघर तबकों के लिए हेल्प डेस्क:

    जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) आवश्यकतानुसार रैन बसेरों, असंगठित मजदूरों, गरीबों और बेघर नागरिकों के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित करेंगे, जिससे कोई भी पात्र नागरिक मतदाता बनने से वंचित न रहे।

  • फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र पर स्थिति स्पष्ट:

    SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ आवश्यक घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) प्रस्तुत करने की व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बरकरार रखा गया है।

  • ECINET की उच्चस्तरीय समीक्षा:

    निर्वाचन प्रबंधन प्रणाली (ECINET) की समग्र समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) और IIT/IIM के स्वतंत्र तकनीकी व प्रबंधन विशेषज्ञों की एक विशेष समिति गठित की जाएगी।

  • दावे और आपत्तियों की तारीखों का विस्तार:

    राज्यों में चल रही प्रक्रिया के तहत दावों और आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा तय की गई है—दिल्ली के लिए अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र के लिए 12 अक्टूबर निर्धारित की गई है।

  • बैठकों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता:

    आयोग की सभी आधिकारिक बैठकों का एजेंडा अब निर्धारित समय से पहले सदस्यों को भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही (Minutes of Meeting) बाकायदा दर्ज कर जारी की जाएगी।

  • अधिकारियों की APAR रिपोर्ट की अंतिम तिथि:

    प्रशासनिक अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) हर साल 31 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पूरी करनी होगी।

  • विदेश यात्राओं पर पूर्व अनुमति अनिवार्य:

    आयोग से जुड़े अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब चुनाव आयोग की पूर्व मंजूरी आवश्यक कर दी गई है।

  • निर्देशों का सख्ती से अनुपालन:

    चुनाव आयुक्तों द्वारा आयोग के अधिकारियों को जारी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

2. छूटे हुए मतदाताओं और युवाओं के लिए निरंतर अपडेशन का अवसर

आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है।

आयोग ने उन मतदाताओं के लिए स्थिति स्पष्ट की है जिनका नाम सूची में नहीं आ सका:

  • यदि SIR के दौरान या उसके बाद किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गया है, तो वे परेशान न हों।

  • इसके अलावा, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा या पहली बार मतदाता बनने के पात्र नागरिक निरंतर अपडेशन (Continuous Updating) व्यवस्था के तहत अपने संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवेदन देकर मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वा सकते हैं।

निष्कर्ष

आयोग की इस उच्चस्तरीय बैठक से यह स्पष्ट संदेश गया है कि निर्वाचन आयोग न केवल आंतरिक समन्वय और पारदर्शिता को मजबूत कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों, गरीबों और पहली बार वोट देने वाले युवाओं के लिए मतदाता बनने की प्रक्रिया को सुगम व संवेदनशील बनाने के लिए भी प्रतिबद्ध है।