गुजरात के 9 प्रमुख तीर्थों में सजने वाला है गरबा का अलौकिक रंग !

गुजरात सरकार और देवस्थान ट्रस्टों की अनूठी पहल: अंबाजी, पावागढ़ समेत 9 प्रमुख शक्तिपीठों में आयोजित होंगे भव्य पारंपरिक गरबा महोत्सव। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था।

गुजरात के 9 प्रमुख तीर्थों में सजने वाला है गरबा का अलौकिक रंग !

गुजरात के 9 प्रमुख शक्तिपीठों और देवस्थानों में नवरात्रि पर जमेगी गरबा की धूम: अंबाजी और पावागढ़ समेत सभी मंदिरों में भव्य तैयारियां

गुजरात में शक्ति, भक्ति और उल्लास का महापर्व नवरात्रि विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नवरात्रि महोत्सव के दौरान राज्य के प्रमुख 9 तीर्थस्थलों में मां जगदंबा की आराधना के साथ-साथ पारंपरिक गरबा की भव्य छटा देखने को मिलेगी। प्रसिद्ध शक्तिपीठ अंबाजी और पावागढ़ सहित राज्य भर के नौ प्रमुख देवस्थानों में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इन 9 प्रमुख देवस्थानों में दिखेगी गरबा की रौनक

राज्य सरकार के पर्यटन विभाग और मंदिर ट्रस्टों के संयुक्त तत्वावधान में चयनित इन 9 देवस्थानों में नवरात्रि के नौ दिनों तक विशेष भक्तिमय माहौल रहेगा:

  1. अंबाजी शक्तिपीठ (बनासकांठा): मां अंबे के मूल पीठ पर भव्य चाचर चौक में पारंपरिक गरबा का आयोजन होगा।

  2. पावागढ़ (पंचमहाल): महाकाली माता मंदिर में दर्शन के साथ-साथ तलहटी क्षेत्र में पारंपरिक शेरी गरबा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।

  3. बहुचराजी (मेहसाणा): शक्ति उपासना के इस केंद्र पर शास्त्रीय और लोक गरबा की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहेंगी।

  4. चामुंडा माता मंदिर (चोटिला, सुरेंद्रनगर): पहाड़ी की तलहटी में श्रद्धालुओं के लिए सामूहिक गरबा महोत्सव।

  5. मोढेरा (मेहसाणा): ऐतिहासिक सूर्य मंदिर के प्रांगण में प्राचीन कला और लोक संस्कृति का संगम।

  6. उमिया धाम (उंझा): पाटीदार समाज की कुलदेवी मां उमिया के प्रांगण में भक्ति संगीत और गरबा।

  7. खोडलधाम (कागवड, राजकोट): सौराष्ट्र के इस भव्य धाम में विशाल गरबा मंडलियों का संगम।

  8. माता नो मढ़ (कच्छ): मां आशापुरा के दरबार में कच्छी लोक संगीत और पारंपरिक गरबा रास।

  9. माधवपुर घेड (पोरबंदर / तटीय सौराष्ट्र): ऐतिहासिक सांस्कृतिक धरोहर स्थल पर पारंपरिक रास-गरबा।

आधुनिकता और परंपरा का संगम

इन सभी स्थलों पर आधुनिक 'डीजे और लाउड म्यूजिक' के बजाय मां की स्तुति, पारंपरिक ढोल, मंजीरा और शास्त्रीय छंदों पर आधारित पारंपरिक शेरी गरबा को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • दीप प्रज्ज्वलन व आरती: शाम की महाआरती के बाद अखंड ज्योत के इर्द-गिर्द श्रद्धालु पारंपरिक परिधानों (केडियु, चणिया-चोली) में गरबा खेलेंगे।

  • सांस्कृतिक मंडलियां: राज्य के जाने-माने लोक गायक और भजन मंडलियां माताजी की प्राची गरबी और छंद प्रस्तुत करेंगे।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रबंध किए गए हैं:

  • भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा: सभी 9 परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, पुलिस बल और होमगार्ड के जवान तैनात रहेंगे।

  • सुगम दर्शन: वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए विशेष कतार, व्हीलचेयर और ई-रिक्शा की व्यवस्था।

  • स्वास्थ्य एवं स्वच्छता: 24x7 मेडिकल बूथ, एम्बुलेंस और निरंतर सफाई अभियान।

  • परिवहन: जीएसआरटीसी (GSRTC) द्वारा प्रमुख शहरों से इन देवस्थानों के लिए अतिरिक्त बस सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

नवरात्रि में गुजरात के इन पावन तीर्थों पर उमड़ने वाली आस्था और गरबा की यह अनूठी परंपरा पूरे राज्य को भक्ति और उल्लास के अनूठे रंग में रंगने के लिए तैयार है।